What is Spirituality?

Updated: Jul 28

What is Spirituality / रुहानियत / अध्यात्मिकता ?

इसको हम Spirituality कहे या, रुहानियत कहे, या फिर अध्यात्मिकता कहे , इन सबका अर्थ एक ही है इन तिन्हो शब्द मे एक शब्द तो सब मे समान हे , समाया हुआ है और वह यह है कि Spirituality मे Spirit और रुहानियत मे रुह और अध्यात्मिकता मे आत्मा विचार किया जाये तो Spirit / रुह/आत्मा इन शब्दो का अर्थ तो एक ही है धर्म के प्रति मनुष्य का झुकाव होना कोई आश्चर्य कि बात नहीं है चाहे इसके लिये उसे किसी नये धर्म कि खोज ही क्यों न करनी पडे अभी इस समय सारे संसार मे Spirituality / रुहानियत / अध्यात्मिकता यह संकल्पना अपने अपने धर्म को लेकर ही सीमित है ईश्वर के बारे मे कुछ नियम बनाकर, उसे अच्छे से रूप देकर, अपने धर्म के लिये यह संकल्पना अपनाइ है पहले भी हम यह कह चुके है कि, Spirituality /रुहानियत/अध्यात्मिकता इन सब मे स्पिरिट/रुह/आत्मा यह शब्द है और इसका अर्थ भी एक है जिसे Soul भी कहा जाता है सभी धर्म के अनुसार हमारी आत्मा उस ईश्वर कि अंश है तो सोचने कि बात है की, Spirituality /रुहानियत/अध्यात्मिकता इसका अर्थ और संकल्पना भी एक होनी चाहिये लेकिन यह सभी ने अपने धर्म के अनुसार अपना अपना अर्थ लिया है

भौतिक चीजों के विपरीत आत्मा को उस परमात्मा के साथ मिलाप करने योग्य होने के लिए जितनी भी गुणवत्ता है, उसको सच्ची रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता कहा जा सकता है दरसल सभी धर्म के रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता का सखोल अभ्यास किया जाए सभी धर्मग्रंथ को पढा जाए, समझा जाए तो एक ही बात सामने आयेगी की “आत्मा का उस ईश्वर के साथ मिलाप

लेकिन आज कल सिर्फ धर्मग्रंथ को पढा जा रहा है, समझा भी जा रहा है लेकिन अफसोस की बात है, उस पर अमल तो बहुत कम किया जाता है जिन्होंने उन पर अमल किया, सिर्फ वही लोग सच्ची रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता को जान सके है

रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता एक व्यापक अवधारणा है सामान्यतः इसमे अपने आप से बडी चीजोंसे से संबंध की भावना शामिल होती है सच्चाई मे तो रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता एक सार्वभौमिक मानवी अनुभव है, जो सभी को छुता है इसमे लोक सिर्फ अपने अध्यात्मिक अनुभव को ही वर्णन कर सकते है

सारे जग को रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता का सच्चा अर्थ सिर्फ संत ने बताया है, क्योंकि उन्होंने ही सच्ची रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता का अनुभव किया होता है सामान्य मनुष्य भी रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता का अनुभव कर सकता है लेकिन उनको अनुभव प्राप्त करने के लिए संतों ने बताये हुए मार्ग पर ही चलना होता है जब सामान्य व्यक्ति बताये गये मार्ग पर सच्चाई के साथ चलता है, तो वह भी संत का रूप हो जाता है और रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता का अनुभव होता है

रूहानियत /Spirituality/ आध्यात्मिकता क्या है, इसे परिभाषित करना आसान नही है मनुष्य अपने विवेक का इस्तेमाल करके, क्या अच्छा और क्या बुरा ? या फिर, कौन सी चीज ईश्वर के साथ मिलाप कर सकती है ? और कौन सी चीज हमारी आत्मा को ईश्वर से दूर ले जा सकती है ? इसका चयन करना भी एक रूहनियात का हिस्सा है क्योंकि चयन करने की क्षमता, इसको हम विवेक कहते है विवेक की ताकत सिर्फ और सिर्फ मनुष्य के अंदर ही है इसीलिए संतो ने मनुष्य को “सृष्टी का सरताज” भी कहा है

पुरा संसार अध्यात्मिक दृष्टि से अंधकार मे डूबा है सब लोग अज्ञानता के रोग से ग्रस्त है

जीवन की समस्याओं से परेशान होकर अधिकांश लोग इन तीनों में से किसी एक का सहारा लेते हैं: वे निराशावादियों की तरह शोक में डूब जाते हैं या शराब के नशे के भँवर में फँस जाते हैं या फिर धर्म की ओर रुख करते हैं। इन तीनों में से अंतिम विकल्प ही सबसे अच्छा है। बैठकर रोने-धोने से कोई लाभ नहीं होनेवाला। अपने आप पर तरस खाने, अपने दुःखों के बारे में गिले-शिकवे करने से, अपने दुःखों के लिये दूसरों को कोसने से कोई फायदा नहीं। आत्महत्या करना तो और भी बुरा है। हमारे लिये अच्छा यही है कि हम अपनी कमजोरियों को सहन करें, न कि सहायता के लिये ऐसे साधन अपनाएँ जिनके बारे में हमें कोई ज्ञान नहीं।' संपन्न लोगों को तो निराशावाद का पाठ पढ़ाना बेकार है, क्योंकि वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे। आलस्य, गरीबी और असहनशीलता ने बहुत-से लोगों को या तो धर्म में सुख ढूँढ़ने के लिये प्रेरित किया है, या फिर उन्हें पड़ोसी लोगों से घृणा करना सिखाया है

वैसे तो इसका अर्थ वही शब्द मे छुपा है जैसे की Spirituality यह शब्द Spirit और Ability को मिलाकर बनाया है इसका मतलब है की Spirit की Ability रूहानियत यह शब्द रूह और नियत को मिलाकर बना है इसका अर्थ है की रुह की नियत अध्यात्मिकता यह शब्द मराठी मे भी है यह शब्द भी आत्मिकता शब्द से बना हुआ है इसका अर्थ है आत्मा की ताकत या गुणवत्ता इन सभी शब्द का अर्थ देखे, तो यही सच्चा अर्थ समझ आता है कि, अपनी Spirit / Soul /रूह /आत्मा के गुणवत्ता को, असली स्वरूप को, असली नियत को, असली Ability को पहचान कर , समझकर ,उसको हासिल करना और ईश्वर के साथ मिलाप के योग्य बनाना

और जब अब हमारी Spirit / Soul /रूह /आत्मा ऊस लायक बनती है, तो हमारी Spirit / Soul /रूह /आत्मा का परमात्मा के साथ मिलाप अपने आप होता है

यही सच्ची Spirituality / रूहानियत / अध्यात्मिकता है



 

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